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                        वक़्त कहा                     लेखक निशांत जैन ये कविता पढ़ने के बाद अपना बचपन वर्तमान और आने वाला कल के बारे में सोचने को विवश करता है धन्यवाद निशांत जी

सुनील कुमार: अपने बच्चे की प्रतिभाओं को पहचानिये और उसे आगे बढा...

सुनील कुमार: अपने बच्चे की प्रतिभाओं को पहचानिये और उसे आगे बढा... : �� पिता बेटे को डॉक्टर बनाना चाहता था। बेटा इतना मेधावी नहीं था कि NEET क्लियर कर लेता। इसलिए  दलालों से MBBS की सीट खरीदने का जुगाड़ क...

“चंडी पाठ”

“चंडी पाठ” के अंतिम हिस्सों में आद्या शक्ति के पुनः प्रादुर्भाव और मनुष्यों एवं देवताओं पर उनकी कृपा की चर्चा आती है। हिरण्याक्ष नामक राक्षस के वंश में रुरु नाम के असुर का पुत्र दुर्गमासुर था। उसने वर्षों की कठिन तपस्या करके ब्रह्मा से वर में चारों वेद मांग लिए। कहते हैं कि वर के प्रभाव से जब वेद दुर्गमासुर के पास चले गए तो ऋषि-मुनि वेदों के बिना यज्ञ नहीं कर पाते थे। देवताओं के यज्ञ भाग से विहीन होने पर वर्षा बंद हो गयी और लोग अकालग्रस्त हो गए। ऐसे में देवताओं ने पूरे भुवन की स्वामिनी, देवी भुवनेश्वरी की उपासना की और देवी अपने शताक्षी रूप में प्रकट हुईं। जनता की दुर्दशा देखकर उनके सौ नेत्रों से आंसू बहने लगे और मान्यता है कि उनके रोते रहने के कारण नौ दिनों तक वर्षा होती रही। मनुष्यों के पास खाने पीने की वस्तुओं की कमी न हो इसलिए देवी शाकम्भरी रूप में भी प्रकट हुईं। संभवतः नवरात्र में शाकाहार की परम्परा आद्या शक्ति के इसी शाकम्भरी रूप के कारण है। देवी के नामों को देखने पर एक और भी चीज़ ध्यान में आती है। देवी जिन राक्षसों का वध करती हैं, उनका नाम लिए बिना आप देवी का नाम नहीं ले सकते...

अपने बच्चे की प्रतिभाओं को पहचानिये और उसे आगे बढाइये

🌈 पिता बेटे को डॉक्टर बनाना चाहता था। बेटा इतना मेधावी नहीं था कि NEET क्लियर कर लेता। इसलिए  दलालों से MBBS की सीट खरीदने का जुगाड़ किया । ज़मीन, जायदाद, ज़ेवर सब गिरवी रख के 35 लाख रूपये दलालों को दिए, लेकिन अफसोस वहाँ धोखा हो गया। अब क्या करें...? लड़के को तो डॉक्टर बनाना है कैसे भी...!! फिर किसी तरह विदेश में लड़के का एडमीशन कराया गया, वहाँ लड़का चल नहीं पाया। फेल होने लगा.. डिप्रेशन में रहने लगा। रक्षाबंधन पर घर आया और घर में ही फांसी लगा ली। सारे अरमान धराशायी.... रेत के महल की तरह ढह गए.... 20 दिन बाद माँ-बाप और बहन ने भी कीटनाशक खा कर आत्म-हत्या कर ली। अपने बेटे को डॉक्टर बनाने की झूठी महत्वाकांक्षा ने पूरा परिवार लील लिया। माँ बाप अपने सपने, अपनी महत्वाकांक्षा अपने बच्चों से पूरी करना चाहते हैं ... मैंने देखा कि कुछ माँ बाप अपने बच्चों को Topper बनाने के लिए इतना ज़्यादा अनर्गल दबाव डालते हैं कि बच्चे का स्वाभाविक विकास ही रुक जाता है।  आधुनिक स्कूली शिक्षा बच्चे की Evaluation और Gradening ऐसे करती है, जैसे सेब के बाग़ में सेब की खेती की ...

जनमानस की मार्मिक लोककथा

मार्मिक कहानी है मिथिला और सीता की. आज भी मिथिला में बेटी का नाम मैथिली या सीता नहीं रखा जाता. एक कथा के मुताबिक, सीता के दुर्भाग्य पर सीता के चाचा और बाद में मिथिला नरेश बने कुशध्वज इतने दुःखी हुए कि उन्होंने मिथिला में कई सारी पाबंदियां लगा दीं. विवाह पंचमी के दिन विवाह करना मना कर दिया गया जबकि परंपरा के मुताबिक वह विवाह का सर्वोत्तम दिन माना जाता था. एक ही घर में तीन बेटियों का विवाह मना कर दिया गया क्योंकि उर्मिला को अकारण ही 14 साल का वियोग झेलना पड़ा था. मिथिला में उसी समय से यह परंपरा बना दी गई कि बेटी का विवाह पश्चिम में नहीं होगा. एक कथा यह भी है कि कुशध्वज के बेटे ने राम द्वारा सीता को वनवास दिए जाने के कारण विद्रोह किया था. राम ने उस विद्रोह को कुचल दिया था.           याद रहे कि यह लोक-कथा है जिनका जिक्र राम के जीवनीकार नहीं करते लेकिन यह कथाएं राम को हमारे दिल के बेहद करीब लाती हैं. इन माधरझंड कांग्रेसियों की उस दलील का जनमानस के हृदय का उत्तर हैं जिन्होंने राम को काल्पनिक बताया था. उस लोक-कथा के मुताबिक, सीता इससे बहुत क्षुब्ध हुईं और उन्हों...

गुमनाम महान क्रांतिकारी हरिश्चंद्र की सत्य ऐतिहासिक कथा

गुमनाम महान क्रांतिकारी हरिश्चंद्र की सत्य ऐतिहासिक कथा ............... विक्रमी संवत 1971 यानी 1915 का 20 जनवरी का दिन था। प्रथम विश्व युद्ध छिड़ गया था, पूरे भारत में केवल दो ही क्रांतिकारी ऐसे थे, जो इस युद्ध से लाभ उठाकर भारत को स्वतंत्रा कराना चाहते थे। वे इसी के लिए बात कर रहे थे, ‘‘तो क्या कहते हो हरिश्चंद्र?’’ ‘‘कहना क्या है?’’ हरिश्चंद्र ने राजा महेंद्र प्रताप को कहा, जो मुरसान के जाट राजा दत्त प्रसाद सिंह के भाई और जिंद के राजा रणबीर सिंह के बहनोई थे, ‘‘स्वतंत्राता पाने का इससे अच्छा अवसर नहीं मिलने वाला, हमें जर्मनी जाना चाहिए और जर्मन की मदद से आजादी पाने का रास्ता साफ करना चाहिए।’’ ‘‘अच्छी बात है।’’ अंग्रेज भी राजा महेंद्र प्रताप की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे, लेकिन वे हरिश्चंद्र को अधिक खतरनाक व्यक्ति मानते थे, क्योंकि वह स्वामी श्रद्धानंद का बड़ा बेटा था, जिनके बारे में जगजाहिर था कि वे गुरुकुल में छात्रों को बम बनाना सिखाते हैं और हरिश्चंद्र तो गुरुकुल कांगड़ी का सबसे पहला छात्र था, इसलिए जब महेंद्र प्रताप ने स्वास्थ्य लाभ के बहाने उनके पासपोर्ट में, इटली, फ्रांस, ...

*योग की भ्रांतियां*, योग के बारे में और उनके जवाब.

योग की भ्रांतियां, योग के बारे में और उनके जवाब. 1. मैं तो स्वस्थ्य हूँ, मुझे योग की क्या जरूरत??* -- योग कोई इलाज नही कि इसे बीमार व्यक्ति ही अपनाये*। योग तो खुशमयी जीवन जीने की कला है।और ईश्वर कृपा से यदि आज हम स्वस्थ है तो भविष्य में भी स्वस्थ्य बने रहने हेतु योग अपनाना आवश्यक है, क्योंकि उम्र के साथ बीमारियाँ अक्सर आती ही है। 2. युवाओं की भ्रान्ति कि योग बहुत धीमी गति से होता है इसलिए बोरियत भरा है??* -- वर्तमान युग की समस्या ही तो गति है। हर मनुष्य भागा जा रहा है भौतिकतावाद की और, विलासिता की और, चकाचौंन्ध की और। और बदले में पा रहा है अनेको बीमारियाँ। योग तो आनन्द की और ले जाने वाली राह है। सही तरीके से सिखाये गए योग से कभी बोरियत नही* हो सकती है। 3. बुजुर्गों की भ्रान्ति की हम तो वृद्ध हो गए है इसलिए नही कर सकते है?? -- योग की यही तो विशेषता है कि *योग बच्चे,बूढ़े, स्त्री, पुरुष, युवा, स्वस्थ्य, बीमार हर व्यक्ति कर* सकता है। योग टीचर का कार्य है कि व्यक्तिगत आवश्यकतानुसार कराएं। 4.सबसे बड़ा प्रश्न की क्या योग से वजन कम होगा?* -- योग से निश्चिन्त तौर पर एवं स्थायी ...