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आज का मेरा विचार आज का मेरा विषय है "वेलेंटाइन डे"

आज का मेरा विचार आज का मेरा विषय है "वेलेंटाइन डे" चेतावनी- अगर इस समूह में मेरी कोई बहने या माताये हो और कोई वरिष्ट व्यक्ति हो और जो कोई धार्मिक व्यक्ति हो तो कृपया आप इसे ना पड़े क्योंकि इसमे कुछ बाते ऐसी लिखनी पड़ सकती है जिनसे आप लोगो को असुविधा हो। लेकिन ये विषय आज के नौजवानो का है तो उसी की भाषा का प्रयोग करूँगा। 🙏श्रीमन् महादेवाय नमः🙏 नमस्कार मित्रो विषय गंभीर भी है और हास्यप्रद भी क्योंकि भारत जैसे देश में ऐसे बेहूदा विदेशी त्यौहार को मनाने की जो ललक यहाँ के नौजवानो में दिखती है वो काफी हद तक मूर्खतापूर्ण है क्योंकि पहली बात तो ये की वेलेंटाइन डे को जो लोग प्यार का इजहार करने का दिन मानते है उन लोगो को शायद ये ध्यान नही है की भारत में तो प्यार कण कण में बसता है रग रग में प्यार है हर हिंदुस्तानी के और उस प्यार को अगर आप सिर्फ एक दिन की सीमा में बांधकर मना रहे हो तो बड़ा अजीब लगता है। अब आते है प्यार की बात पर मेरे हिसाब से प्यार तीन तरह का होता है पहला प्यार वो है जिसमे प्यार स्नेह और दुलार की अधिकता होती है और स्वार्थ की भावना नही होती और जो हमारे दिल में स्वजन...

कोलंबिया का एक अखबार था “एल एस्पक्टाडोर”, जिसमें 1955 ने चौदह दिनों की एक सीरीज छपनी शुरू हुई |

कोलंबिया का एक अखबार था “एल एस्पक्टाडोर”, जिसमें 1955 ने चौदह दिनों की एक सीरीज छपनी शुरू हुई | ये सीरीज एक सत्य घटना पर लिखी जा रही थी | सीरीज का हीरो एक करीब बीस साल का नौजवान लुइस अलेक्सान्द्रो वेल्साको, होता है | ये कहानी इसलिए महत्वपूर्ण हो गई थी क्योंकि ये सरकारी बयानों से बहुत अलग थी | सरकारी बयानों में एक ऐसा तूफ़ान गढ़ा गया था, जो कि कभी आया ही नहीं था | सच्चाई ये थी कि जहाज पर तस्करी का माल इतना लाद दिया गया था कि वो डूब गया | असली कहानी ये थी कि वेल्साको अमेरिका से अपने जहाज पर लौट रहे थे | कई दिनों बाद अपने देश लौटने की सब नाविकों को जल्दी भी थी | जहाज पर औकात से ऊपर तस्करी का माल लादकर जहाज को रवाना किया गया था | कर्रिबियन में लहरें ऊँची होती हैं, और जहाज पर वजन ज्यादा था | संभालने की कोशिश में वेल्साको के आठ साथी बह गए और जहाज डूब गया | कोलंबिया की नौ सेना ने चार दिन तलाश की और सभी लापता नाविकों को मृत मानकर खोज बंद कर दी | मगर लुइस वेल्सांको के हाथ कुछ टूटी फूटी सी एक लाइफबोट आ गई थी और वो बच गया था | चार दिन तक जो तलाश करने का बहाना हुआ उसमें भी कुछ तो किया नहीं गया ...

".....सम्भवामि युगे-युगे।,, "न्यायिक राज्य के पूर्णस्थापक थे राम-भार्गव,।

".....सम्भवामि युगे-युगे।,, "न्यायिक राज्य के पूर्णस्थापक थे राम-भार्गव,।  ''जब राजा अपने धर्म से च्युत होकर प्रजा,और अन्य जीवों पर अत्याचारी हो जाए तो ऋषियों का तेज 'मानव एवं जीव,,कल्याण के लिए वाह्य रूप में प्रकट होना आवश्यक है।हरि का अवतार निमित्त है।,,                         'वृहष्पति,   राम भार्गव जिन्हें 'परशुराम,, कहा जाने लगा है... जिस कुल में जन्मे वह भृगु-ऋषि से शुरू हुआ था।  पुराण शास्त्रो के अनुसार प्रारम्भ मे ब्रह्मा के पुत्र,सनक,सनन्दन,सनातन, सनत्कुमार,छायापुत्र(दिव्य-चेतना पुत्र)फिर विष्वकर्मा,अधर्म, अलक्ष्मी, आठवसु, चार कुमार, 14 मनु, 11 रुद्र,इत्यादि देवत्व पराशक्तियां थीं।  पुलस्य, पुलह, अत्रि, क्रतु, अरणि, अंगिरा, रुचि, भृगु, दक्ष, कर्दम, पंचशिखा, वोढु, नारद, मऱीचि, अपान्तरतमा, वशिष्ठ,आदि ऋषि पुत्र हुये थे।इसे ही सनातन चेतना कहा गया।ग्रन्थों और चैतन्य-व्यवस्था के अनुसार प्रारम्भ के नौ ब्राम्हण-ऋषियों से ही सभी वर्णो के लोग निकले।मूल नौ गोत्रो से सारे गोत्र निकले हैं।आगे चलकर कर्...

आक्रमण के हथियार बदल गए हैं-भाग 15

पढ़िए अध्ध्यन रूपी दीर्घकालिक तप से उत्पन्न तेज को महामनीषि Pawan Tripathi ji को आक्रमण के हथियार बदल गए हैं-भाग 15     हम जिस मैदान में खेलते थे।वहां एक 80-82 साल के बुजुर्ग थे।यह 1991 की बात है।शाम को हम जैसे ही उस पार्क में पहुँचते बड़ी सी कोठी के गेट पर खड़े होकर जोर-जोर गालियां बकते थे,बिला-वजह।ऐसी-ऐसी गालियां और अंगों के वर्णन जो मनुष्य जाति ने पहले कभी गौर नही फरमाया होगा।हम तंग आ चुके थे। वह एक ताकत-वर परिवार था।एक दिन उन बुजुर्ग से बात करने गया तो उनका और सेनानी परिवार का समग्र-व्यक्तित्व सामने आ गया।वह पागल नही थे हुजूर यह वे पूरे होशो-हवाश में बात करते थे।उन्हें अन्य कांग्रेसियो की तरह बच्चो से,भारतीय कैटिल क्लास से सख्त नफरत थी।इतनी हिम्मत की उनके घर के सामने,उनके अनुमोदन से बने पार्क में बच्चे खेलें!    मैं ने छान-बीन की।स्वतंतन्त्रता संग्राम सेनानी कहे जाते थे।कागजो में वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जरूर थे लेकिन मुझे,उनके मुहल्ले वालों, उनके जानने वाले किसी को भी,दूर-दूर तक उनके आचरण से स्वतंत्रा संग्राम सेनानी जैसा कोई स्वरूप नहीं दिखता था।मैं ने सब...

करेला का कड़वापन इन 15 खतरनाक बीमारियों का काल है, जानिए और अपनाए

*करेला का कड़वापन इन 15 खतरनाक बीमारियों का काल है, जानिए और अपनाए।* 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 🍁भूख को बढाता है – जिसको भी भूख न लगने की शिकायत है। वो प्रतिदिन करेले का जूस का सेवन करे। इससे आपकी पाचन क्रिया सही रहती है और आपकी भूख को बढती है। 🍁गठिया की बीमारी में “करेले के फायदे” – करेले या उसके पत्ते का रस निकाल कर गरम करे। फिर उस रस को सूजन या दर्द वाली जगह पर लगाये। आपको आराम मिलेगा और प्रतिदिन अपने भोजन में करेला को शामिल करे। 🍁करेले के फायदे खून की कमी में – करेला उन लोगो के लिए फायदेमंद है, जिन्हें खून की कमी है। प्रतिदिन कच्चे करेले का जूस थोडा थोडा सुबह और शाम पिये।इससे आपको लाभ होगा। 🍁कफ के रोग में “करेले के फायदे” – करेले का सेवन करने से आपको कफ से आराम मिलेगा। चुकी करेले में फास्फोरस रहता है, जिसके कारन आपको कफ की समस्या से छुटकारा मिलेगा। 🍁दमा में करेले के फायदे – इस रोग नियमित करेले का सेवन करे। अगर आप करेले की सब्जी के रूप में सेवन कर रहे है तो बिना मसाले की छोंकी हुई सब्जी का उपयोग करे। इससे आपको लाभ मिलेगा। 🍁वजन कम करने में “करेले के फायदे” – सबसे पहले कच्चे क...

घनघोर तिमिर के आंगन में वो बीज उषा का बोता था हुंकार लगाई थी उसने जब सारा भारत सोता था.

घनघोर तिमिर के आंगन में वो बीज उषा का बोता था हुंकार लगाई थी उसने जब सारा भारत सोता था. _______________________________________________ भारत का हिन्दू समाज एक कालखंड में दीर्घ-अवधि के लिये सो गया था जिसके नतीजे में हम सदियों तक बाह्य आक्रमणों से न सिर्फ पीड़ित रहे बल्कि उनकी  गुलामी करने के अभ्यस्त भी हो गये. गुलामी में हमें मज़ा आने लगा. ऐसा भी नहीं है कि इस सुप्तावस्था में हमारे यहाँ कोई जाग्रत महामानव पैदा नहीं हुआ, हुआ पर उनका प्रभाव उनके अपने विराट-व्यक्तित्व पर अवलंबित था. उन्होंने अपने कार्य और दिशा को समाज का कार्य और दिशा नहीं बनाया इसलिये उनके विराट-व्यक्तित्व से भी हमें कोई बहुत लाभ नहीं हुआ. कालान्तर में इसी सुप्त हिन्दू समाज में एक महामानव जन्मा, नाम था महर्षि दयानंद सरस्वती. इस महामानव का और उसके कृतित्व का परिचय अगर मुझे कुछेक वाक्यों में देने को कहा जाये तो मैं कहूँगा कि महर्षि दयानंद सरस्वती हिन्दू आत्मविश्वास और वेद वाक्य "मैं आत्मा हूँ मुझे कोई पराजित नहीं कर सकता" की जीवंत मूर्ति थे, वो संभवतः पहले थे जिन्होंने अपने कार्य और दिशा को समाज का कार्य और दिश...

।। भारत के विंभाजन का इतिहास !

                           ।।वन्दे मातरम।।               भारत के विंभाजन का इतिहास ! भारत को स्वतंत्रता मिली 15 अगस्त 1947 को और भारत की स्वतंत्रता का श्रेय मिला कांग्रेस को, लेकिन एक दिन पूर्व 14 अगस्त 1947 को भारत का विभाजन हुआ और पाकिस्तान बना । जिन लोगों ने पाकिस्तान माँगा, लगभग सभी कांग्रेस के थे, जिनका आगमन खिलाफत आंदोलन में हुआ । खिलाफत आंदोलन की सीमिति के अध्यक्ष गांधी जी थे। खिलाफत आंदोलन का भारत की स्वतंत्रता से कुछ भी लेना देना नहीं था।            टर्की में इस्लाम के खलीफा का तख्ता प्रथम महा युद्ध के पश्चात् इंग्लैंड ने पलट दिया था , जिससे भारत के मुसलमान बहुत दुखी थे , इंग्लैंड पर राजनीतिक दबाव डालने के लिए गांधी जी ने जब यह आंदोलन प्रारम्भ किया और बहुत से मुस्लिम नेता कांग्रेस से जुड़े । तब केरल के मालापुरम ज़िले में हिंदुओं का कत्लेआम हुआ और औरतों के अपहरण और विभितस बलात्कार की घटनाएं हुई लेकिन आंदोलन स्थगित नही किया गया । इसी आंदोलन म...