।। भारत के विंभाजन का इतिहास !

                           ।।वन्दे मातरम।।
              भारत के विंभाजन का इतिहास !

भारत को स्वतंत्रता मिली 15 अगस्त 1947 को और भारत की स्वतंत्रता का श्रेय मिला कांग्रेस को, लेकिन एक दिन पूर्व 14 अगस्त 1947 को भारत का विभाजन हुआ और पाकिस्तान बना । जिन लोगों ने पाकिस्तान माँगा, लगभग सभी कांग्रेस के थे, जिनका आगमन खिलाफत आंदोलन में हुआ । खिलाफत आंदोलन की सीमिति के अध्यक्ष गांधी जी थे। खिलाफत आंदोलन का भारत की स्वतंत्रता से कुछ भी लेना देना नहीं था।
           टर्की में इस्लाम के खलीफा का तख्ता प्रथम महा युद्ध के पश्चात् इंग्लैंड ने पलट दिया था , जिससे भारत के मुसलमान बहुत दुखी थे , इंग्लैंड पर राजनीतिक दबाव डालने के लिए गांधी जी ने जब यह आंदोलन प्रारम्भ किया और बहुत से मुस्लिम नेता कांग्रेस से जुड़े । तब केरल के मालापुरम ज़िले में हिंदुओं का कत्लेआम हुआ और औरतों के अपहरण और विभितस बलात्कार की घटनाएं हुई लेकिन आंदोलन स्थगित नही किया गया । इसी आंदोलन में जो मुस्लिम नेता कांग्रेस से जुड़े और एक मुस्लिम लीग के फाउंडर सदस्य तो 1923 में अखिल भारतीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने ।
             इन्ही लोगों ने बाद में पाकिस्तान बनाने की नींव डाली और 14 अगस्त 1947 को भारत का विभाजन हुआ और 15 अगस्त  1947 को बचा-खुचा भारत स्वतंत्र हुआ ।
          इस विंभाजन का दुखद पहलु यह था कि भारत के विंभाजन का अंतिम समय जून/जुलाई 1948 तक था लेकिन मात्र 2 मास के कम समय की भीतर विंभाजन होने से 35 से 40 लाख हिन्दू मारे गए , महिलाओं का अपहरण और शीलहरण हुआ, हिन्दू लाखों की संख्या से विस्थापित हुए । कहा जा सकता है कि यह खिलाफत आंदोलन का भाग दो था।
          इस विंभाजन का इतिहास नहीं लिखा गया , इस विंभाजन का कौन सा राजनीतिक दल ज़िम्मेवार था , यह सत्य और तथ्य भारत के नागरिक नही जान पाए ।
--- ओम प्रकाश त्रेहन

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