रोग के कीटाणु अब अपने भीतर एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक शक्ति पैदा कर रहे है जी । कृपया ध्यान से पढ़े :- हाल ही में एक अमेरिकन स्त्री की मृत्यु एक ऐसे जीवाणु के संक्रमण से हो गयी । जिस पर अब तक ज्ञात सभी ऐंटीबायोटिक बेअसर साबित हुए । उसके अंदर मौजूद निमोनिया के जीवाणु ने एक जीन विकसित कर लिया । जिसके कारण उस पर वर्तमान एलोपैथी की सभी एंटीबीओटिक फ़ैल हो गयी । उस महिला का इलाज़ भारत में हुआ था । इस लिए उस जीवाणु की उत्पत्ति भारत से मानी गयी और इसका कारण भारत में सभी एंटीबीओटिक के अत्यधिक प्रयोग को माना गया। ये क्या हुआ इसको समझने के लिए प्रकृति के सामान्य सिद्धांत को समझ लेते हैं । जहाँ कहीं भी आहार होगा उसको पंचतत्वों (अग्नि,वायु,जल,भूमि,आकाश) में विलीन करने के लिए चारों और से माइक्रोब्स(जीवाणु) सक्रीय हो जाएंगे । और तब तक कार्य करेंगे जब तक विलीनीकरण की क्रिया सम्पूर्ण नहीं हो जाती। उदहारण के लिए यदि हम एक हंडिया में मल भरकर रख देते हैं , तो उसमें जीवाणु और कीड़े पैदा हो...
आदि शंकराचार्य के शिष्य विश्व विजेता सम्राट सुधन्वा चौहान - विश्वविजेता हिन्दू सम्राटों की कड़ी में आज बात करेंगे सम्राट सुधन्वा चौहान की कई महाशय इनबॉक्स कमेंट इत्यादि में कहते हैं इतिहास में जो गुजर गया उसे देख कर क्या होगा वर्तमान जो हो रहा हैं उसे देखिये तो उनके बातों का उत्तर हैं “मैक्स-मुलर भारत आते ही सर्वप्रथम हिन्दुओ के पराक्रम एवं भुजाओं की शक्ति के बारे में जब जानना चाहा तब उसको इतिहास बताया गया उसका सर घूम गया इतिहास सुनकर उसने अपने साथी से कहा अगर यह इतिहास नहीं मिटाया गया तो हमें दुनिया से मिटा देंगे क्योंकि पूर्वजो के इतिहास से इन्हें उर्जा मिलती हैं इनका इतिहास में इनकी शक्ति छुपी हैं तो इस गोरे सियार को युक्ति सूझी इसने हिन्दू राजाओ को निर्बल ठेराया । मुस्लिम आक्रमणकारी लगभग आधा यूरोप जिहाद कर के अपने कब्जे में ले लिए थे परन्तु भारतवर्ष से सनातन धर्म को नही मिटा पाया इस्लामिक इतिहासकार ने भी माना था हिन्दू योद्धाओ के बाहुबल का लोहा यह मैक्स मुलर की नफरत थी हिन्दुओं के प्रति जिन्होंने इतिहास को बदल दिया और मुग़ल , यवन , यूनान को ताकतवर बताया एवं हिन्दू राज...
ये विकास क्या बला है? विकास किसे कहेंगे.. Written by:- शुभम वर्मा पिछले १० या १५ सालों से “विकास” नाम का शब्द बार बार सुनने में आता है... हर किसी को विकसित होना है. चाहे लोग हो, समाज हो या देश. यह विकास क्या होता है ? यह कभी पता नहीं चल पाया, क्योंकि वो भी खुश नहीं जो गाँव में हैं और वो भी खुश नहीं जो शहर में हैं तथा वो भी खुश नहीं जो विदेश में हैं | फिर विकास के गीत गाकर आखिर मिला क्या , यह सोचने पर मुझे मजबूर होना पढ़ा | सोचा थोडा विकास के विषय में पढता हूँ और जानता हूँ कि विकास आखिर है क्या ? जब पढना शुरू किया तो पता चला के द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह शब्द प्रयोग किया था | जिसमे उन्होंने कहा था- “हम पश्चिम के देश मुख्यतः अमेरिका विकसित देश है और बाकी सब अविकसित या विकासशील देश हैं |” चूँकि यह देश द्वितीय विश्वयुद्ध जीते हुए देश थे तो सभी गुलाम देशों ने या गरीब देशों ने इनकी बात मान ली, तथा वहीँ से यह पैमाना तय हो गया कि विकसित होना मतलब पश्चिम और अमेरिका में जो होता है वैसा होना... और अविकसित वो लोग हैं जो अपना खुद का कुछ करते हैं. इसी से फिर व...
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