आदि शंकराचार्य के शिष्य विश्व विजेता सम्राट सुधन्वा चौहान - विश्वविजेता हिन्दू सम्राटों की कड़ी में आज बात करेंगे सम्राट सुधन्वा चौहान की कई महाशय इनबॉक्स कमेंट इत्यादि में कहते हैं इतिहास में जो गुजर गया उसे देख कर क्या होगा वर्तमान जो हो रहा हैं उसे देखिये तो उनके बातों का उत्तर हैं “मैक्स-मुलर भारत आते ही सर्वप्रथम हिन्दुओ के पराक्रम एवं भुजाओं की शक्ति के बारे में जब जानना चाहा तब उसको इतिहास बताया गया उसका सर घूम गया इतिहास सुनकर उसने अपने साथी से कहा अगर यह इतिहास नहीं मिटाया गया तो हमें दुनिया से मिटा देंगे क्योंकि पूर्वजो के इतिहास से इन्हें उर्जा मिलती हैं इनका इतिहास में इनकी शक्ति छुपी हैं तो इस गोरे सियार को युक्ति सूझी इसने हिन्दू राजाओ को निर्बल ठेराया । मुस्लिम आक्रमणकारी लगभग आधा यूरोप जिहाद कर के अपने कब्जे में ले लिए थे परन्तु भारतवर्ष से सनातन धर्म को नही मिटा पाया इस्लामिक इतिहासकार ने भी माना था हिन्दू योद्धाओ के बाहुबल का लोहा यह मैक्स मुलर की नफरत थी हिन्दुओं के प्रति जिन्होंने इतिहास को बदल दिया और मुग़ल , यवन , यूनान को ताकतवर बताया एवं हिन्दू राज...
🌅 *फेंगशुई एक धोखा, भारत को बचाइए* 🌅 दोस्तों यह किस्सा मेरे नए मकान लेने की खुशी में दी गई पार्टी का है। किसी बड़े शहर में खुद का मकान होना मानो एक सपने की तरह होता है। और अगर यह सपना आपकी जवानी में ही साकार हो जाए तो खुशी दुगुनी हो जाती है। मेरे परिवार ने भी इस खुशी को बांटने के लिए अपने सभी मित्रों और रिश्तेदारों को शाम को डिनर पर बुलाया था। हसी-मजाक और मस्ती के माहौल में रात कैसे हो गई पता ही नहीं चला। शिष्टाचारवश जाते समय मित्रों ने नए घर के लिए उपहार भेंट किए। अगली सुबह जब हमने उपहारों को खोलना शुरू किया तो मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं था! एक दो उपहारों को छोड़कर बाकी सभी में लाफिंग बुद्धा, फेंगशुई पिरामिड, चाइनीज़ ड्रेगन, कछुआ, चाइनीस फेंगसुई सिक्के, तीन टांगों वाला मेंढक, और हाथ हिलाती हुई बिल्ली जैसी अटपटी वस्तुएं भी दी गई थी।जिज्ञासावश मैंने इन उपहारों के साथ आए कागजों को पढ़ना शुरू किया जिसमें इन फेंगशुई के मॉडलों का मुख्य काम और उसे रखने की दिशा के बारे में बताया गया था। जैसे लाफिंग बुद्धा का काम घर में धन, दौलत, अनाज और प्रसन्नता लाना था और उसे दरवाजे की ओर मुख कर...
👉 युग बदल रहा है-हम भी बदलें Atmiya Parijan सुनील कुमार! 🔵 भले ही लोग सफल नहीं हो पा रहे हैं पर सोच और कर यही रहे हैं कि वे किसी प्रकार अपनी वर्तमान सम्पत्ति को जितना अधिक बढ़ा सकें, दिखा सकें उसकी उधेड़ बुन में जुटे रहें। यह मार्ग निरर्थक है। आज की सबसे बड़ी बुद्धिमानी यह है कि किसी प्रकार गुजारे की बात सोची जाए। परिवार के भरण-पोषण भर के साधन जुटाये जायें और जो जमा पूँजी पास है उसे लोकोपयोगी कार्य में लगा दिया जाए। जिनके पास नहीं है वे इस तरह की निरर्थक मूर्खता में अपनी शक्ति नष्ट न करें। जिनके पास गुजारे भर के लिए पैतृक साधन मौजूद हैं, जो उसी पूँजी के बल पर अपने वर्तमान परिवार को जीवित रख सकते हैं वे वैसी व्यवस्था बना कर निश्चित हो जायें और अपना मस्तिष्क तथा समय उस कार्य में लगायें, जिसमें संलग्न होना परमात्मा को सबसे अधिक प्रिय लग सकता है। 🔴 समय ही मनुष्य की व्यक्तिगत पूँजी है, श्रम ही उसका सच्चा धर्म है। इसी धन को परमार्थ में लगाने से मनुष्य के अन्तःकरण में उत्कृष्टता के संस्कार परिपक्व होते हैं। धन वस्तुतः समाज एवं राष्ट्र की सम्पत्ति है। उसे व्यक्तिगत समझना एक पाप ...
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