रोग के कीटाणु अब अपने भीतर एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक शक्ति पैदा कर रहे है जी । कृपया ध्यान से पढ़े :- हाल ही में एक अमेरिकन स्त्री की मृत्यु एक ऐसे जीवाणु के संक्रमण से हो गयी । जिस पर अब तक ज्ञात सभी ऐंटीबायोटिक बेअसर साबित हुए । उसके अंदर मौजूद निमोनिया के जीवाणु ने एक जीन विकसित कर लिया । जिसके कारण उस पर वर्तमान एलोपैथी की सभी एंटीबीओटिक फ़ैल हो गयी । उस महिला का इलाज़ भारत में हुआ था । इस लिए उस जीवाणु की उत्पत्ति भारत से मानी गयी और इसका कारण भारत में सभी एंटीबीओटिक के अत्यधिक प्रयोग को माना गया। ये क्या हुआ इसको समझने के लिए प्रकृति के सामान्य सिद्धांत को समझ लेते हैं । जहाँ कहीं भी आहार होगा उसको पंचतत्वों (अग्नि,वायु,जल,भूमि,आकाश) में विलीन करने के लिए चारों और से माइक्रोब्स(जीवाणु) सक्रीय हो जाएंगे । और तब तक कार्य करेंगे जब तक विलीनीकरण की क्रिया सम्पूर्ण नहीं हो जाती। उदहारण के लिए यदि हम एक हंडिया में मल भरकर रख देते हैं , तो उसमें जीवाणु और कीड़े पैदा हो...
इस लेख मे मै आप को हल्दीघाटी युद्ध के शहीद और बचे हुए योद्धाओं की जानकारी देने के साथ यही बताना चाहता हू की हमारी अवधारणा बनी है कि प्रताप जी का साथ राजपूतो ने नही दिया वो गलत है।ये भी सत्य है कि महाराणा जी के विरूद्ध दमदारी से जो लड़े वो राजपूत ही थे। हल्दीघाटी युद्ध में जीवित बचने वाले प्रमुख योद्धा" 1) घाणेराव के ठाकुर गोपालदास राठौड़ :- उदयपुर स्थित प्रताप गौरव केन्द्र में हल्दीघाटी युद्ध में वीरगति पाने वाले योद्धाओं की सूची में इनका नाम भी लिखा गया है, जो कि सही नहीं है | दरअसल गोपालदास राठौड़ को हल्दीघाटी युद्ध में कुल 27 घाव लगे व जीवित रहे | बाद में कुम्भलगढ़ के युद्ध में भी महाराणा प्रताप के साथ रहे | 2) कुंवर शैखासिंह :- ये महाराणा प्रताप व रानी फूल कंवर राठौड़ के पुत्र थे | 3) भामाशाह कावड़िया 4) ताराचन्द कावड़िया :- ये भामाशाह के भाई थे 5) कोशीथल की महारानी :- ये हल्दीघाटी युद्ध में भाग लेने वाली एकमात्र क्षत्राणी थीं | इनके बारे में अगले भाग में लिखा जाएगा | 6) सलूम्बर रावत कृष्णदास चुण्डावत 7) रामा सांदू (चारण कवि) - इनका नाम हल्दीघाटी युद्ध में वीरग...
गीता में लिखी ये 10 भयंकर बातें कलयुग में हो रही है सच, ... <3 <3. 1.ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया ।कालेन बलिना राजन् नङ्क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः ॥ इस श्लोक का अर्थ है कि कलयुग में धर्म, स्वच्छता, सत्यवादिता, स्मृति, शारीरक शक्ति, दया भाव और जीवन की अवधि दिन-ब-दिन घटती जाएगी. 2.वित्तमेव कलौ नॄणां जन्माचारगुणोदयः ।धर्मन्याय व्यवस्थायां कारणं बलमेव हि ॥ इस गीता के श्लोक का अर्थ है की कलयुग में वही व्यक्ति गुनी माना जायेगा जिसके पास ज्यादा धन है. न्याय और कानून सिर्फ एक शक्ति के आधार पे होगा! 3. दाम्पत्येऽभिरुचि र्हेतुः मायैव व्यावहारिके । स्त्रीत्वे पुंस्त्वे च हि रतिः विप्रत्वे सूत्रमेव हि ॥ इस श्लोक का अर्थ है की कलयुग में इस्त्री-पुरुष बिना विवाह के केवल रूचि के अनुसार ही रहेंगे. व्यापार की सफलता के लिए मनुष्य छल करेगा और ब्राह्मण सिर्फ नाम के होंगे. 4. लिङ्गं एवाश्रमख्यातौ अन्योन्यापत्ति कारणम् ।अवृत्त्या न्यायदौर्बल्यं पाण्डित्ये चापलं वचः ॥ इस श्लोक का अर...
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