अनुवादों के #कूटबुद्धिजीवियों के माया जाल से जकड़ा गुलाम मानसिक भारत और भारतीय
#India_That_is_Bharat
अनुवादों के #कूटबुद्धिजीवियों के माया जाल से जकड़ा गुलाम मानसिक भारत और भारतीय।
"Man is social animal" . किसी भी डॉक्टरेट की डिग्री से उपाधित बेहतर समझ वाला व्यक्ति से भी ये पूंछो कि क्या आप इस नारे से सहमत हैं तो वो तत्काल बोलता है कि - हाँ सहमत हूँ ।
उससे पुनः पूँछिये कि इसका हिंदी में अनुवाद क्या है तो वो बोलता है कि "मनुष्य एक सामजिक प्राणी है"।
लेकिन फिर उसी से पूँछिये कि animal का अनुवाद जानवर होता है प्राणी नही , इसलिए सही अनुवाद है कि "मनुष्य एक सामाजिक जानवर है" ।
क्योंकि प्राण जिसके भी अंदर है वो प्राणी होता है।
अर्थात कुकुर बिलार चमगादड़ नेउर बिच्छू सांप चींटी बिस्तुइया आदि आदि सभी प्राणी है , लेकिन क्या ये सब जानवर है ?
नहीं न ।
ये सब जीव जंतु है ।
Greek Philosopher Aristotle wrote it " A man is social animal . One who lives without society is either beast or God".
चूंकि अरस्तू ने ये बोला कि "मनुष्य एक सामाजिक जानवर है और जो समाज में निवास नहीं करता वो या तो हिंसक पशु है या फिर ईश्वर" इसलिए औपनिवेशिक गुलामी में जकड़े कूट बुद्धि प्रवंचको के लिए ब्रम्ह वाक्य हो गया ।
और उन्होंने अनुवादों के जरिये प्रत्येक भारतीय के मस्तिष्क में शिक्षा संस्थानों के माध्यम से प्रत्येक शिक्षित नौजवान के मस्तिष्क में कॉपी पेस्ट कर रहे हैं।
http://www.preservearticles.com/201104306137/why-man-is-called-as-a-social-animal.html
मूल प्रश्न ये है कि अरस्तू जैसा विद्वान इस नारे को देने पर मजबूर क्यों हुवा ?
इसका उत्तर आपको विश्व के 2000 के आर्थिक इतिहास की विवेचना करने वाले अंगुस मैडिसन की खोजी पुस्तक में मिलेगा।
उसने बताया कि रोमन साम्राज्य का आधार था।
1-slavery यानि गुलामी
2- Military पावर यानि जिसकी लाठी उसकी भैंस अर्थात मत्सन्याय अर्थात जंगल राज ।
( इतने दृष्टान्त इसलिए दे रहा हूँ क्योंकि तीसरे आधार में जिस शक्ति का प्रयोग होता था उसको सैन्य शक्ति नही करती। बल्कि मिलिट्री पावर करती थी । आप हो सकता है भूलवश मिलिट्री पावर का अनुवाद सैन्य शक्ति में कर लेते)
3- Plunder यानि लूट हत्या बलात्कार और नगर और गाँव का विध्वंस।
और जब ईसाइयत पनपी और भारत तक आयी तो वो सभ्यता और संस्कृति उनकी वंशजो के गुणसूत्रों के माध्यम से उनके साथ भारत की धरती पर भी अवतरित हुई अन्यथा विल दुरंत जैसा विद्वान उनको pirate यानि समुद्री डकैत घोसित न करता।
#अनुवादों_की_समस्या : भाग -1
डकैत और बाहुबली आतंकवादी माफिया डॉन आदि आदि नए नए नाम है जिनका चरित्र क्या है ?
उसका मोडस ऑपरेंडी क्या है ?
येन केन प्रकारेण निहत्थे शारीरिक बल से कमजोर लेकिन उच्च नैतिक आदर्शों वाले लोगों को जान का भय दिखाकर भय का राज्य कायम करते हुए अपना साम्राज्य स्थापित करना।
लेकिन जिन लोगों ने आसमानी किताब के वॉर मंनुअल की वार तकनीक अपनाते हुए यदि हथियार बन्द लोगों से लड़ाई कर अपना शासन स्थापित किया होता तो कोई बात भी होती ।
आज UNO ने भी नियम बनाया है कि Non Combatants यानि जो योद्धा नही है उसके ऊपर युद्ध में वॉर नही किया जाय।
ये भारत की परंपरा थी ।
लेकिन जिन महान शासकों ने निहत्थे नागरिकों की गर्दन काटी हो, और उनका धन संपत्ति लूटकर औरतों को अपनी हरमो में सेक्स स्लेव बनाया हो , फिर भी इतिहासकारों ने उसको अकबर महान घोसित किया हो ,उनको क्या कहा जाना चाहिए ?
आज भी इराक में यही इतिहास दुहराया जा है यजीदियों के साथ। उनकी औरतो को वॉर मंनुअल आज भी सेक्स स्लेव बनाया जा रहा है ।
इनको बर्बर या beast ही कहा जा सकता है। पशु भी इनसे श्रेष्ठ चरित्र के होते हैं ।
#जाति का अर्थ है - #सामान्य #जन्म ।
अब इसमें अनुसूचित जाति का अर्थ बताएं ?
मनुस्मृति में #अनुसूचित जाति दर्ज है क्या ?
कौन इसका विरोधी है ?
क्या असामान्य जन्म चाहते हो ?
है कोई जो इस चुनौती को स्वीकार कर सकता है ?
अनुवादों की समस्या ।
कास्ट का अनुवाद जाति और धर्म का अनुवाद रिलिजन।
।
तो हाफ कास्ट , क्वार्टर कास्ट का अर्थ मनुवादी बताएँगे या दोगले इसाई ।
शूद्र , वैश्य , क्षत्रिय और ब्राम्हण #वर्ण है ।
भारतीय संविधान ने उनको #जाति बनाया या #मनुस्मृति ने ?
संभल के आना #बहुजनों ।
एक कमेंट में #हरिजन बना दूंगा ।
स्वतंत्र भारत के परतंत्र तंत्र और मानसिक गुलामी की समस्या ।
उसका उत्पाद - संविधान । एक गुलामों के लिए #मानसिक गुलामों द्वारा बनाया गया विधान।
#मनु को क्यों घसीट रहे हो ?
मनु को साइमन कमीशन में quote किया गया है????
इस प्रश्न का उत्तर कौन देगा???
द्रविड़ क्षेत्रीय पहचान है जैसे - बनारसी या कानपुरिया या कन्नौजिया।
डॉ त्रिभुवन सिंह की पोस्ट और कॉमेंट से संकलित।
अनुवादों के #कूटबुद्धिजीवियों के माया जाल से जकड़ा गुलाम मानसिक भारत और भारतीय।
"Man is social animal" . किसी भी डॉक्टरेट की डिग्री से उपाधित बेहतर समझ वाला व्यक्ति से भी ये पूंछो कि क्या आप इस नारे से सहमत हैं तो वो तत्काल बोलता है कि - हाँ सहमत हूँ ।
उससे पुनः पूँछिये कि इसका हिंदी में अनुवाद क्या है तो वो बोलता है कि "मनुष्य एक सामजिक प्राणी है"।
लेकिन फिर उसी से पूँछिये कि animal का अनुवाद जानवर होता है प्राणी नही , इसलिए सही अनुवाद है कि "मनुष्य एक सामाजिक जानवर है" ।
क्योंकि प्राण जिसके भी अंदर है वो प्राणी होता है।
अर्थात कुकुर बिलार चमगादड़ नेउर बिच्छू सांप चींटी बिस्तुइया आदि आदि सभी प्राणी है , लेकिन क्या ये सब जानवर है ?
नहीं न ।
ये सब जीव जंतु है ।
Greek Philosopher Aristotle wrote it " A man is social animal . One who lives without society is either beast or God".
चूंकि अरस्तू ने ये बोला कि "मनुष्य एक सामाजिक जानवर है और जो समाज में निवास नहीं करता वो या तो हिंसक पशु है या फिर ईश्वर" इसलिए औपनिवेशिक गुलामी में जकड़े कूट बुद्धि प्रवंचको के लिए ब्रम्ह वाक्य हो गया ।
और उन्होंने अनुवादों के जरिये प्रत्येक भारतीय के मस्तिष्क में शिक्षा संस्थानों के माध्यम से प्रत्येक शिक्षित नौजवान के मस्तिष्क में कॉपी पेस्ट कर रहे हैं।
http://www.preservearticles.com/201104306137/why-man-is-called-as-a-social-animal.html
मूल प्रश्न ये है कि अरस्तू जैसा विद्वान इस नारे को देने पर मजबूर क्यों हुवा ?
इसका उत्तर आपको विश्व के 2000 के आर्थिक इतिहास की विवेचना करने वाले अंगुस मैडिसन की खोजी पुस्तक में मिलेगा।
उसने बताया कि रोमन साम्राज्य का आधार था।
1-slavery यानि गुलामी
2- Military पावर यानि जिसकी लाठी उसकी भैंस अर्थात मत्सन्याय अर्थात जंगल राज ।
( इतने दृष्टान्त इसलिए दे रहा हूँ क्योंकि तीसरे आधार में जिस शक्ति का प्रयोग होता था उसको सैन्य शक्ति नही करती। बल्कि मिलिट्री पावर करती थी । आप हो सकता है भूलवश मिलिट्री पावर का अनुवाद सैन्य शक्ति में कर लेते)
3- Plunder यानि लूट हत्या बलात्कार और नगर और गाँव का विध्वंस।
और जब ईसाइयत पनपी और भारत तक आयी तो वो सभ्यता और संस्कृति उनकी वंशजो के गुणसूत्रों के माध्यम से उनके साथ भारत की धरती पर भी अवतरित हुई अन्यथा विल दुरंत जैसा विद्वान उनको pirate यानि समुद्री डकैत घोसित न करता।
#अनुवादों_की_समस्या : भाग -1
डकैत और बाहुबली आतंकवादी माफिया डॉन आदि आदि नए नए नाम है जिनका चरित्र क्या है ?
उसका मोडस ऑपरेंडी क्या है ?
येन केन प्रकारेण निहत्थे शारीरिक बल से कमजोर लेकिन उच्च नैतिक आदर्शों वाले लोगों को जान का भय दिखाकर भय का राज्य कायम करते हुए अपना साम्राज्य स्थापित करना।
लेकिन जिन लोगों ने आसमानी किताब के वॉर मंनुअल की वार तकनीक अपनाते हुए यदि हथियार बन्द लोगों से लड़ाई कर अपना शासन स्थापित किया होता तो कोई बात भी होती ।
आज UNO ने भी नियम बनाया है कि Non Combatants यानि जो योद्धा नही है उसके ऊपर युद्ध में वॉर नही किया जाय।
ये भारत की परंपरा थी ।
लेकिन जिन महान शासकों ने निहत्थे नागरिकों की गर्दन काटी हो, और उनका धन संपत्ति लूटकर औरतों को अपनी हरमो में सेक्स स्लेव बनाया हो , फिर भी इतिहासकारों ने उसको अकबर महान घोसित किया हो ,उनको क्या कहा जाना चाहिए ?
आज भी इराक में यही इतिहास दुहराया जा है यजीदियों के साथ। उनकी औरतो को वॉर मंनुअल आज भी सेक्स स्लेव बनाया जा रहा है ।
इनको बर्बर या beast ही कहा जा सकता है। पशु भी इनसे श्रेष्ठ चरित्र के होते हैं ।
#जाति का अर्थ है - #सामान्य #जन्म ।
अब इसमें अनुसूचित जाति का अर्थ बताएं ?
मनुस्मृति में #अनुसूचित जाति दर्ज है क्या ?
कौन इसका विरोधी है ?
क्या असामान्य जन्म चाहते हो ?
है कोई जो इस चुनौती को स्वीकार कर सकता है ?
अनुवादों की समस्या ।
कास्ट का अनुवाद जाति और धर्म का अनुवाद रिलिजन।
।
तो हाफ कास्ट , क्वार्टर कास्ट का अर्थ मनुवादी बताएँगे या दोगले इसाई ।
शूद्र , वैश्य , क्षत्रिय और ब्राम्हण #वर्ण है ।
भारतीय संविधान ने उनको #जाति बनाया या #मनुस्मृति ने ?
संभल के आना #बहुजनों ।
एक कमेंट में #हरिजन बना दूंगा ।
स्वतंत्र भारत के परतंत्र तंत्र और मानसिक गुलामी की समस्या ।
उसका उत्पाद - संविधान । एक गुलामों के लिए #मानसिक गुलामों द्वारा बनाया गया विधान।
#मनु को क्यों घसीट रहे हो ?
मनु को साइमन कमीशन में quote किया गया है????
इस प्रश्न का उत्तर कौन देगा???
द्रविड़ क्षेत्रीय पहचान है जैसे - बनारसी या कानपुरिया या कन्नौजिया।
डॉ त्रिभुवन सिंह की पोस्ट और कॉमेंट से संकलित।
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