हल्दीघाटी युद्ध के शहीद और बचे हुए योद्धाओं की जानकारी

इस लेख मे मै आप को हल्दीघाटी युद्ध के शहीद और बचे हुए योद्धाओं की जानकारी देने के साथ यही बताना चाहता हू की हमारी अवधारणा बनी है कि प्रताप जी का साथ राजपूतो ने नही दिया वो गलत है।ये भी सत्य है कि महाराणा जी के विरूद्ध दमदारी से जो लड़े वो राजपूत ही थे।

हल्दीघाटी युद्ध में जीवित बचने वाले प्रमुख योद्धा"

1) घाणेराव के ठाकुर गोपालदास राठौड़ :- उदयपुर स्थित प्रताप गौरव केन्द्र में हल्दीघाटी युद्ध में वीरगति पाने वाले योद्धाओं की सूची में इनका नाम भी लिखा गया है, जो कि सही नहीं है | दरअसल गोपालदास राठौड़ को हल्दीघाटी युद्ध में कुल 27 घाव लगे व जीवित रहे | बाद में कुम्भलगढ़ के युद्ध में भी महाराणा प्रताप के साथ रहे |

2) कुंवर शैखासिंह :- ये महाराणा प्रताप व रानी फूल कंवर राठौड़ के पुत्र थे |

3) भामाशाह कावड़िया

4) ताराचन्द कावड़िया :- ये भामाशाह के भाई थे

5) कोशीथल की महारानी :- ये हल्दीघाटी युद्ध में भाग लेने वाली एकमात्र क्षत्राणी थीं | इनके बारे में अगले भाग में लिखा जाएगा |

6) सलूम्बर रावत कृष्णदास चुण्डावत

7) रामा सांदू (चारण कवि) - इनका नाम हल्दीघाटी युद्ध में वीरगति पाने वालों में लिया जाता है, जो कि सही नहीं है | क्योंकि हल्दीघाटी युद्ध के बारे में रामा सांदू के लिखे हुए दोहे मिलते हैं | रामा सांदू धरमा सांदू के पुत्र थे |

8) गोरधन बोगस (चारण कवि) - इन्होंने बाद में कुम्भलगढ़ के युद्ध में महाराणा प्रताप का साथ दिया ।

9) पानरवा के राणा पूंजा भील :- इनका नाम भी वीरगति पाने वालों में लिया जाता है, जबकि इन्होंने छापामार युद्धों में महाराणा प्रताप का भरपूर साथ दिया | राणा पूंजा का देहान्त हल्दीघाटी युद्ध के 34 वर्ष बाद हुआ |

10) मांडण कूंपावत :- इन्होंने बाद में गोगुन्दा के युद्ध में महाराणा प्रताप का साथ दिया |

11) देवगढ़ के कुंवर दूदा चुण्डावत :- ये रावत सांगा चुण्डावत के पुत्र थे ।

12) जवास के रावत बाघसिंह चौहान

* इन योद्धाओं ने युद्ध में भाग तो लिया, परन्तु इनके वीरगति पाने या न पाने के विषय में सन्देह है :-

1) मानसिंह :- ये महाराणा प्रताप के भाई थे
2) बनोल के ठाकुर तेजमल राठौड़
3) शेरखान चौहान
4) सादड़ी के ठाकुर किशनदासोत कावेड़िया
5) गोपालदास मेड़तिया
6) नगा
7) संभरी नरेश संग्रामसिंह
8) वागड़ के नाथा चौहान

हल्दी घाटी के युद्ध मे महाराणा जी के बहुत से योद्धा शहीद हुए जिसमे राजपूतो की संख्या बहुतायत थी ।

हल्दीघाटी युद्ध में वीरगति को प्राप्त होने वाले प्रमुख मेवाड़ी योद्धा"
==================================
1) ग्वालियर के राजा रामशाह तोमर
2) कुंवर शालिवाहन तोमर (रामशाह तोमर के पुत्र व महाराणा प्रताप के बहनोई)
3) कुंवर भान तोमर (रामशाह तोमर के पुत्र)
4) कुंवर प्रताप तोमर (रामशाह तोमर के पुत्र)
5) भंवर धर्मागत तोमर (शालिवाहन तोमर के पुत्र)
6) दुर्गा तोमर (रामशाह तोमर के साथी)
7) बाबू भदौरिया (रामशाह तोमर के साथी)
8) खाण्डेराव तोमर (रामशाह तोमर के साथी)
9) बुद्ध सेन (रामशाह तोमर के साथी)
10) शक्तिसिंह राठौड़ (रामशाह तोमर के साथी)
11) विष्णुदास चौहान (रामशाह तोमर के साथी)
12) डूंगर (रामशाह तोमर के साथी)
13) कीरतसिंह (रामशाह तोमर के साथी)
14) दौलतखान (रामशाह तोमर के साथी)
15) देवीचन्द चौहान (रामशाह तोमर के साथी)
16) छीतर सिंह चौहान (हरिसिंह के पुत्र व रामशाह तोमर के साथी)
17) अभयचन्द्र (रामशाह तोमर के साथी)
18) राघो तोमर (रामशाह तोमर के साथी)
19) राम खींची (रामशाह तोमर के साथी)
20) ईश्वर (रामशाह तोमर के साथी)
21) पुष्कर (रामशाह तोमर के साथी)
22) कल्याण मिश्र (रामशाह तोमर के साथी)
23) बदनोर के ठाकुर रामदास राठौड़ (वीरवर जयमल राठौड़ के 7वें पुत्र) :- ये अपने 9 साथियों समेत काम आए |
24) बदनोर के कुंवर किशनसिंह राठौड़ (ठाकुर रामदास राठौड़ के पुत्र)
25) जालौर के मानसिंह सोनगरा चौहान (महाराणा प्रताप के मामा) :- ये अपने 11 साथियों समेत काम आए
26) कान्ह/कान्हा (महाराणा प्रताप के भाई) :- इनके वंशज आमल्दा व अमरगढ़ में हैं |
27) कल्याणसिंह/कल्ला (महाराणा प्रताप के भाई)
28) कानोड़ के रावत नैतसिंह सारंगदेवोत
29) केशव बारठ (कवि) :- ये सोन्याणा वाले चारणों के पूर्वज थे |
30) जैसा/जयसा बारठ (कवि) :- ये भी सोन्याणा वाले चारणों के पूर्वज थे |
31) कान्हा सांदू (चारण कवि)
32) कोठारिया के पृथ्वीराज चुण्डावत (पत्ता चुण्डावत के बड़े भाई)
33) आमेट के ठाकुर कल्याणसिंह चुण्डावत (वीरवर पत्ता चुण्डावत के पुत्र) - इनके पीछे रानी बदन कंवर राठौड़ सती हुईं | रानी बदन कंवर मेड़ता के जयमल राठौड़ की पुत्री थीं |
34) देसूरी के खान सौलंकी (ठाकुर सावन्त सिंह सौलंकी के पुत्र)
35) नीमडी के महेचा बाघसिंह राठौड़ कल्लावत (मल्लीनाथ के वंशज)
36) देवगढ़ के पहले रावत सांगा चुण्डावत :- ये वीरवर पत्ता चुण्डावत के पिता जग्गा चुण्डावत के भाई थे | रावत सांगा देवगढ़ वालों के मूलपुरुष थे |
37) देवगढ़ के कुंवर जगमाल चुण्डावत (रावत सांगा चुण्डावत के पुत्र)
38) शंकरदास जैतमालोत राठौड़ (ठि. बनोल)
39) रामदास जैतमालोत राठौड़ (ठि. बनोल)
40) केनदास जैतमालोत राठौड़ (ठि. बनोल)
41) नरहरीदास जैतमालोत राठौड़ (ठि. बनोल) :- ये शंकरदास राठौड़ के पुत्र थे |
42) नाहरदास जैतमालोत राठौड़ (ठि. बनोल) :- ये शंकरदास राठौड़ के पुत्र थे |
43) राजपुरोहित नारायणदास पालीवाल के 2 पुत्र
44) किशनदास मेड़तिया
45) सुन्दरदास
46) जावला
47) प्रताप मेड़तिया राठौड़ (वीरमदेव के पुत्र व वीरवर जयमल राठौड़ के भाई)
48) बदनोर के कूंपा राठौड़ (वीरवर जयमल राठौड़ के पुत्र)
49) राव नृसिंह अखैराजोत (पाली के अखैराज के पुत्र)
50) प्रयागदास भाखरोत
51) मानसिंह
52) मेघराज
53) खेमकरण
54) भगवानदास राठौड़ (केलवा के ईश्वरदास राठौड़ के पुत्र)
55) नन्दा पडियार
56) पडियार सेडू
57) साँडू पडियार
58) अचलदास चुण्डावत
59) रावत खेतसिंह चुण्डावत के पुत्र
60) झाड़ौल के राजराणा झाला मान/झाला बींदा
61) बागड़ के ठाकुर नाथुसिंह मेड़तिया
61) देलवाड़ा के मानसिंह झाला
62) सरदारगढ़ के ठाकुर भीमसिंह डोडिया
63) सरदारगढ़ के कुंवर हम्मीर सिंह डोडिया (ठाकुर भीमसिंह के पुत्र)
64) सरदारगढ़ के कुंवर गोविन्द सिंह डोडिया (ठाकुर भीमसिंह के पुत्र)
65) सरदारगढ़ के ठाकुर भीमसिंह डोडिया के 2 भाई

66) पठान हाकिम खां सूर (शेरशाह सूरी के वंशज, मायरा स्थित शस्त्रागार के प्रमुख व मेवाड़ के सेनापति)

67) मोहम्मद खान पठान
68) जसवन्त सिंह
69) कोठारिया के राव चौहान पूर्बिया
70) रामदास चौहान
71) राजा संग्रामसिंह चौहान
72) विजयराज चौहान
73) राव दलपत चौहान
74) दुर्गादास चौहान (परबत सिंह पूर्बिया के पुत्र)
75) दूरस चौहान (परबत सिंह पूर्बिया के पुत्र)
76) सांभर के राव शेखा चौहान
77) हरिदास चौहान
78) बेदला के भगवानदास चौहान (राव ईश्वरदास के पुत्र)
79) शूरसिंह चौहान
80) रामलाल
81) कल्याणचन्द मिश्र
82) प्रतापगढ़ के कुंवर कमल सिंह
83) धमोतर के ठाकुर कांधल जी :- देवलिया महारावत बीका ने अपने भतीजे ठाकुर कांधल जी को हल्दीघाटी युद्ध में लड़ने भेजा था |
84) अभयचन्द बोगसा चारण
85) खिड़िया चारण
86) रामसिंह चुण्डावत (सलूम्बर रावत कृष्णदास चुण्डावत के भाई)
87) प्रतापसिंह चुण्डावत (सलूम्बर रावत कृष्णदास चुण्डावत के भाई)
88) गवारड़ी (रेलमगरा) के मेनारिया ब्राह्मण कल्याण जी पाणेरी
89) श्रीमाली ब्राह्मण :- इनके पीछे इनकी एक पत्नी सती हुईं | रक्त तलाई (खमनौर) में इन सती माता का स्थान अब तक मौजूद है |
90) कीर्तिसिंह राठौड़
91) जालमसिंह राठौड़
92) आलमसिंह राठौड़
93) भवानीसिंह राठौड़
94) अमानीसिंह राठौड़
95) रामसिंह राठौड़
96) दुर्गादास राठौड़
97) कानियागर के मानसिंह राठौड़
98) राघवदास
99) गोपालदास सिसोदिया
100) मानसिंह सिसोदिया
101) राजा विट्ठलदास
102) भाऊ
103) पुरोहित जगन्नाथ
104) पडियार कल्याण
105) महता जयमल बच्छावत
106) महता रतनचन्द खेमावत
107) महासहानी जगन्नाथ
108) पुरोहित गोपीनाथ
109) बिजौलिया के राव मामरख पंवार (महाराणा प्रताप के ससुर व महारानी अजबदे बाई के पिता)
110) बिजौलिया के कुंवर डूंगरसिंह पंवार (महारानी अजबदे बाई के भाई)
111) बिजौलिया के कुंवर पहाडसिंह पंवार (महारानी अजबदे बाई के भाई)
112) ताराचन्द पंवार (खडा पंवार के पुत्र)
113) सूरज पंवार (खडा पंवार के पुत्र)
114) वीरमदेव पंवार
115) राठौड़ साईंदास पंचायनोत जेतमालोत (कल्ला राठौड़ के पुत्र) :- ये अपने 13 साथियों समेत काम आए |
116) मेघा खावडिया (राठौड़ साईंदास के साथी)
117) सिंधल बागा (राठौड़ साईंदास के साथी)
118) दुर्गा चौहान (राठौड़ साईंदास के साथी)
119) वागडिया (राठौड़ साईंदास के साथी)
120) जयमल (राठौड़ साईंदास के साथी)
121) नागराज

Comments

Popular posts from this blog

गणेश सखाराम देउसकर की "देश की कथा " से / भाग -1 सखाराम गणेश देउस्कर लिखित 1904 में 'देशेर कथा' बांग्ला में लिखी गयी।

आदि शंकराचार्य के शिष्य विश्व विजेता सम्राट सुधन्वा चौहान -

महाराणा कुम्‍भकर्ण: कुम्भा