श्रीसरस्वत्यष्टोत्तर शतनामस्तोत्रम्

श्रीसरस्वत्यष्टोत्तर शतनामस्तोत्रम्॥*

_सरस्वती महाभद्रा महामाया वरप्रदा।_
_श्रीप्रदा पद्मनिलया पद्माक्षी पद्मवक्त्रगा॥१॥_

_शिवानुजा पुस्तकधृत् ज्ञानमुद्रा रमा परा।_
_कामरूपा महाविद्या महापातकनाशिनी॥२॥_

_महाश्रया मालिनी च महाभोगा महाभुजा।_
_महाभागा महोत्साहा दिव्याङ्गा सुरवन्दिता॥३॥_

_महाकाली महापाशा महाकारा महाङ्कुशा।_
_सीता च विमलाविश्वा विद्युन्माला च वैष्णवी॥४॥_

_चन्द्रिका चन्द्रवदना चन्द्रलेखाविभूषिता।_
_सावित्री सुरसा देवी दिव्यालङ्कारभूषिता॥५॥_

_वाग्देवी वसुधा तीव्रा महाभद्रा महाबला।_
_भोगदा भारती भामा गोविन्दा गोमती शिवा॥६॥_

_जटिलाविन्ध्यवासा च विन्ध्याचलविराजिता।_
_चण्डिका वैष्णवी ब्राह्मी ब्रह्मज्ञानैकसाधना॥७॥_

_सौदामिनी सुधामूर्तिस्सुभद्रा सुरपूजिता।_
_सुवासिनी सुनासा च विनिद्रा पद्मलोचना॥८॥_

_विद्यारूपा विशालाक्षी ब्रह्मजाया महाफला।_
_त्रयीमूर्ती त्रिकालज्ञा त्रिगुणा शास्त्ररूपिणी॥९॥_

_शुम्भासुरप्रमथिनी शुभदा च सर्वात्मिका।_
_रक्तबीजनिहन्त्री च चामुण्डाचाम्बिका तथा॥१०॥_

_मुण्डकाय प्रहरणा धूम्रलोचनमर्दना।_
_सर्वदेवस्तुता सौम्या सुरासुरनमस्कृता॥११॥_

_कालरात्री कलाधारा रूप सौभाग्यदायिनी।_
_वाग्देवी च वरारोहा वाराही वारिजासना॥१२॥_

_चित्राम्बरा चित्रगन्धा चित्रमाल्यविभूषिता।_
_कान्ता कामप्रदा वन्द्या विद्याधरा सूपूजिता॥१३॥_

_श्वेतासना नीलभुजा चतुर्वर्गफलप्रदा।_
_चतुराननसाम्राज्या रक्तमध्या निरञ्जना॥१४॥_

_हंसासना नीलजङ्घा ब्रह्मविष्णुशिवात्मिका।_
_एवं सरस्वती देव्या नाम्नामष्टोत्तरशतम्॥१५॥_

                *इति*
*🌺श्रीसरस्वत्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्*🌺
              *सम्पूर्णम्॥*



M🙏🏻🌺सरस्वतीद्वादशनामस्तोत्रम्🌺🙏🏻*

_सरस्वती शुक्लवर्णासस्मितांसुमनोहराम।_
_कोटिचन्द्रप्रभामुष्टश्री युक्त विग्रहाम॥_

_वह्निशुद्धांशुकाधानांवीणा पुस्तक धारिणीम्।_
_रत्नसारेन्द्रनिर्माण नव भूषण भूषिताम॥_

_सुपूजितांसुरगणैब्रह्म विष्णु शिवादिभि:।_
_वन्दे भक्त्यावन्दितांचमुनीन्द्रमनुमानवै:॥_

*प्रथमं भारती नाम द्वितीयं च सरस्वती।*
*तृतीयं शारदा देवी चतुर्थ हंस वाहिनी॥*

*पञ्चमजगतीख्याता षष्ठंवागीश्वरी तथा।*
*सप्तमेकुमुदीप्रोक्ता अष्टमेब्रह्मचारिणी॥*

*नवमं बुद्धिदात्री च दशमं वरदायिनी।*
*एकादशं चन्द्रकान्ति द्वादशं भुवनेश्वरी॥*

*द्वादशैतानि नामानी त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः।*
*जिह्वाग्रेवसते नित्यं ब्रह्मरूपासरस्वती॥*

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आप सभी को भगवती माँ सरस्वती के प्रादुर्भाव दिवस (सरस्वती जयंती) एवं बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं..!

"भगवती माँ सरस्वती" के प्राकट्य दिवस पर हमारा कृतज्ञता भरा अभिनंदन स्वीकार करे।

प्राकटयेन सरस्वत्या वसंत पंचमी तिथौ।
विद्या जयंती सा तेन लोके सर्वत्र कथ्यते॥

बसंत पंचमी तिथि में "भगवती माँ सरस्वती" का प्रादुर्भाव होने के कारण संसार में सर्वत्र इसे विद्या जयंती कहा जाता है; "भगवती माँ सरस्वती" विद्या और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं।

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता; या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता; सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥

जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं, और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं।

जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली "माँ सरस्वती" हमारी रक्षा करें॥1॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।

हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥2॥

शुक्लवर्ण वाली, संपूर्ण चराचर जगत् में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली; सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान के अँधेरे को मिटाने वाली।

हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान् बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करती हूँ॥2॥

"माँ सरस्वती" हमारे जीवन की जड़ता को दूर करती हैं; आज "माँ सरस्वती" पूजन के शुभ अवसर पर हम लौकिक अध्ययन और आत्मिक स्वाध्याय से अपने जीवन को प्रकाशमान करें यही शुभेक्छा है।

जय माँ शारदे...!!!

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