भारत तिहास की शुद्धिकरण
मनीषा सिंह की कलम से इतिहास की शुद्धिकरण तो करना ही होगा वरना ना देश बचेगा ना देशभक्त !!
हमारे इतिहास में इस तरह से घालमेल हुआ हैं गुप्त वंशीय राजा चन्द्रगुप्त एवं चन्द्रगुप्ता मौर्या को मिश्रित कर चुके हैं चन्द्रगुप्त से १२०० पूर्व चन्द्रगुप्त मौर्य हुए थे गुप्त वंशीय राजा चन्द्रगुप्ता का शासनकाल 327-320 ईस्वी पूर्व (In the true aspect of the matter of Maurya Chandragupta has to be taken back to B.C 1534 i.e. nearly,1200 years earlier-: Reference Indian Chronology Author Pandit Venkatachelam) यूरोपियन प्राच्यविद् एवं इतिहासकारों अपने ही सिद्धांतो को सही ठहराने के लिए ग्रीक इतिहासकारों का सिकंदर एवं सैंड्रोकोट्स का युद्ध जो असल में समुद्रगुप्त और सिकंदर के मध्य हुआ था गुप्ता वंशी राजा चन्द्र गुप्ता ने अपने पुत्र समुद्रगुप्त को सिकंदर से युद्ध करने भेजा था राजा पुरु के सहायता के लिए इस युद्ध को ब्रिटिश इतिहासकारों ने चन्द्रगुप्त मौर्या और सिकंदर का युद्ध वर्णन किया जो पूर्णरूप से गलत हैं सैंड्रोकोट्स असल में समुद्रगुप्त को कहा गया था ना की चन्द्रगुप्त मौर्य को यूरोपियन प्राच्यविद् द्वारा इस विषय में पंडित कोटा वेंकटाचेलाम ने खण्डन किया और कहा (The European orientalists and historians seem to have started a theory of their own that the basic fact of ancient Indian history was the supposed contemporaneity of Alexander the great (326 B.C) and the Sandracottus (Sandra Greek meaning Ocean) mention by the Greek historians who was wrongly identified by them as Chandragupta Maurya of Magadha (1534 B.C), The Greek Historians never mentioned either Maurya Chandragupta or Gupta Chandragupta . Then how can we identify Sandrakottas by them with Chandragupta Maurya? In the absence of any evidence , inscriptional , numismatic or other it is improper to identity Sandrakottus of the Greeks with Chandragupta Maurya Page-: 3 and 6 Indian Chronology Author Pandit Venkatachelam )
गुप्ता वंशी चन्द्रगुप्ता के साथ 327 ईस्वी पूर्व सिकंदर का युद्ध हुआ था और उस युद्ध में सेनापति बने थे सांड्राकोट्टस अर्थात समुद्रगुप्ता जिन्होंने सिकंदर को परास्त कर बेबीलोनिया वापस भेजा था (Page-: 7 The above facts prove that contemporary of Alexander was Gupta ChandraGupta (327 B.C) and not Chandragupta Maurya (1534 B.C) The Plot in Indian Chronology Author Pandit Venkatachelam)
गुप्ता राजवंशा का राजा चन्द्रगुप्त के पुत्र समुद्रगुप्त (३२० ईस्वी पूर्व २६९ ईस्वी पूर्व) गुप्त राजवंश का राजा था भगवान श्रीकृष्ण के वंश में 138 वी पीढ़ी में सम्राट सैंड्रोकोट्स(समुद्रगुप्त) हुए थे उनकी राजधानी इन्द्रप्रस्थ (पालीबोथ्रा) थी महाभारत में लिखा है (महाराज युधिष्ठिर ने अपने अंतिम समय अर्जुन जी के पौत्र परीक्षितजी को हस्तिनापुर का राज्य दिया था और भगवान् श्रीकृष्ण के प्रपौत्र बज्रनाभ को इन्द्रप्रस्थ का राज्य दिया था श्रीकृष्ण के प्रपौत्र बज्र जीवित बचे थे भाटी ,जडेजा राजस्थान में श्रीकृष्ण के वंशज हैं) मेगास्थनीज ने लिखा है हरिकुलिश (श्रीकृष्ण ) शौरसेनी (यादव) जाति का राजा था , उसने कई विवाह किये व् उसके कई पुत्र हुए । उसने मेथोरा (मथुरा) क्लीसोबेरा (कृष्णनगर-द्वरिका) और पालिबोथरा (इंद्रप्रस्थ) नगर वसाये । हरिकुलिश की 138 वी पीढ़ी में राजा सैंड्रोकोट्स (समुद्रगुप्त) हुए इसका प्रमाण इतिहासकार चिंतामणि विनायक वैद्य ने अपने इतिहास ग्रन्थ “महाभारतमीमांसा” के प्रष्ठ 91 पर किया है ।
समुद्र्गुप्त भारत का महान शासक था जिसने अपने जीवन काल मे कभी भी पराजय का स्वाद नही चखा। अतः उसके बारे मे स्मिथ ने सही कहा है कि समुद्रगुप्त “भारत का नेपोलियन” था । गुप्ता वंशी राजा चन्द्र गुप्ता के वक़्त से ग्रीक आक्रमणकारियों के हमले झेल रहे थे भारत सम्राट चन्द्र गुप्ता के पुत्र समुद्रगुप्त ने ग्रीक आक्रमणकारियों को पूर्वी सिंध नदी को पार करने से पूर्व खदेड़ा गया राजा बन्ने से पूर्व समुद्रगुप्त ने ३२५ ईस्वी पूर्व राजा पुरु के सेनापति बनकर सेना की अगुवाई किया एवं झेलम नदी के तट पर सिकंदर को परास्त कर भारतवर्ष से खदेड़ा था ।
अशोक प्रशस्ति जिसे तथाकथित इतिहासकारों ने मौर्य वंशी अशोक का अभिलेख होने का दावा किया हैं दरअसल वोह अभिलेख मौर्या वंशी राजा अशोकवर्धन पर नहीं बल्कि गुप्ता साम्राज्य के राजा समुद्रगुप्त पर था जिन्हें अशोकादित्य की उपाधि प्राप्त किये थे अशोकादित्य के अभिलेख को यूरोपियन इतिहासकारों ने मौर्यवंशी अशोक का अभिलेख मान लिया (Somayajulu, as quoted by Pandit Kota “The so-called inscriptions of Aśoka do not belong to Aśoka. Most of them do not make any mention of Aśoka. If one or two mentions Aśoka they do not refer to Aśoka Vardhana of the Maurya dynasty, but they refer to Samudragupta of the Gupta dynasty who assumed the title of Aśokaditya.” Reference-: The Plot in Indian Chronology Author Pandit Venkatachelam) ।
सन ३०६ ईस्वी पूर्व समुद्रगुप्ता ने झेलम नदी के तट पर यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को पराजित कर यूरेशिया पर विजय प्राप्त किया था जिन देशो पर विजय प्राप्त किया उनका नाम हैं एरिया, अराकोसिया, जेड्रोसिया, पेरोपेनिसडाई के भू-भाग को अधिकृत कर विशाल गुप्ता साम्राज्य की स्थापना की परन्तु यहाँ भी यूरोपियन इतिहासकार के लिखे किताब पढ़ के आधुनिक इतिहासकारों ने गलत व्याख्यान किया और एरिया को हेरात, अराकोसिया को कंधार,जेड्रोसिया पेरोपेनिसडाई को काबुल बना दिया जब की ग्रीक इतिहासकार के अनुसार एरिया, अराकोसिया, जेड्रोसिया, पेरोपेनिसडाई यूरोप का हिस्सा हैं आइये देखते हैं ग्रीक इतिहासकार क्या कहते हैं जैसे जेड्रोसिया के बारे में (Gedrosia is the borderline of the southern part of the countries of Bactria, Arachosia and Drangiana) इससे पता चलता हैं गलत व्याख्यान किया गया हैं जिन यूरोप देशो पर समुद्रगुप्त ने भगवा परचम लहराया था उन देशो को एशिया का हिस्सा बना दिया गया हैं विदेशी इतिहासकारों द्वारा । समुद्रगुप्ता ने गौरवशाली इतिहास रचा था अपनी विजयरथ भारतवर्ष से निकालकर एशिया , यूरेशिया, यूरोप देश की प्राचीन राजधानी बुडापेस्ट लम्पाक , गुरुंड को जीत कर रोका था ।
समुद्रगुप्त की दूसरी लड़ाई अँटिगोनस प्रथम से सन ३०३ ईस्वी पूर्व जेड्रोसिया में हुआ था इसके पश्चात समूल यूरोप ने समुद्रगुप्त की अधीनता स्वीकार कर लिया था समुद्रगुप्त के आधीन कुल ७५ से अधिक छोटे – बड़े देश उनके साम्राज्य में सम्मिलित हुए थे ।
दो बड़ी लड़ाईयां लड़ने के बाद पूरा यूरोप यूरेशिया पर समुद्रगुप्त का शाशन स्थापित होगया ऐसे विश्व विजयी समारत का इतिहास केवल दो पन्नो में समेट दिया गया ।
इस खोज को पूरा करने में कुल १४ किताब का योगदान हैं जिसमे से अति महत्वपूर्ण किताब हैं
१) इंडियन क्रोनोलॉजी श्री कोटा वेंकटचेलाम
२) Somayajulu Quoted Indian History
३) इतिहासकार चिंतामणि विनायक वैद्य कृत इतिहास ग्रन्थ “महाभारतमीमांसा”
हमारे इतिहास में इस तरह से घालमेल हुआ हैं गुप्त वंशीय राजा चन्द्रगुप्त एवं चन्द्रगुप्ता मौर्या को मिश्रित कर चुके हैं चन्द्रगुप्त से १२०० पूर्व चन्द्रगुप्त मौर्य हुए थे गुप्त वंशीय राजा चन्द्रगुप्ता का शासनकाल 327-320 ईस्वी पूर्व (In the true aspect of the matter of Maurya Chandragupta has to be taken back to B.C 1534 i.e. nearly,1200 years earlier-: Reference Indian Chronology Author Pandit Venkatachelam) यूरोपियन प्राच्यविद् एवं इतिहासकारों अपने ही सिद्धांतो को सही ठहराने के लिए ग्रीक इतिहासकारों का सिकंदर एवं सैंड्रोकोट्स का युद्ध जो असल में समुद्रगुप्त और सिकंदर के मध्य हुआ था गुप्ता वंशी राजा चन्द्र गुप्ता ने अपने पुत्र समुद्रगुप्त को सिकंदर से युद्ध करने भेजा था राजा पुरु के सहायता के लिए इस युद्ध को ब्रिटिश इतिहासकारों ने चन्द्रगुप्त मौर्या और सिकंदर का युद्ध वर्णन किया जो पूर्णरूप से गलत हैं सैंड्रोकोट्स असल में समुद्रगुप्त को कहा गया था ना की चन्द्रगुप्त मौर्य को यूरोपियन प्राच्यविद् द्वारा इस विषय में पंडित कोटा वेंकटाचेलाम ने खण्डन किया और कहा (The European orientalists and historians seem to have started a theory of their own that the basic fact of ancient Indian history was the supposed contemporaneity of Alexander the great (326 B.C) and the Sandracottus (Sandra Greek meaning Ocean) mention by the Greek historians who was wrongly identified by them as Chandragupta Maurya of Magadha (1534 B.C), The Greek Historians never mentioned either Maurya Chandragupta or Gupta Chandragupta . Then how can we identify Sandrakottas by them with Chandragupta Maurya? In the absence of any evidence , inscriptional , numismatic or other it is improper to identity Sandrakottus of the Greeks with Chandragupta Maurya Page-: 3 and 6 Indian Chronology Author Pandit Venkatachelam )
गुप्ता वंशी चन्द्रगुप्ता के साथ 327 ईस्वी पूर्व सिकंदर का युद्ध हुआ था और उस युद्ध में सेनापति बने थे सांड्राकोट्टस अर्थात समुद्रगुप्ता जिन्होंने सिकंदर को परास्त कर बेबीलोनिया वापस भेजा था (Page-: 7 The above facts prove that contemporary of Alexander was Gupta ChandraGupta (327 B.C) and not Chandragupta Maurya (1534 B.C) The Plot in Indian Chronology Author Pandit Venkatachelam)
गुप्ता राजवंशा का राजा चन्द्रगुप्त के पुत्र समुद्रगुप्त (३२० ईस्वी पूर्व २६९ ईस्वी पूर्व) गुप्त राजवंश का राजा था भगवान श्रीकृष्ण के वंश में 138 वी पीढ़ी में सम्राट सैंड्रोकोट्स(समुद्रगुप्त) हुए थे उनकी राजधानी इन्द्रप्रस्थ (पालीबोथ्रा) थी महाभारत में लिखा है (महाराज युधिष्ठिर ने अपने अंतिम समय अर्जुन जी के पौत्र परीक्षितजी को हस्तिनापुर का राज्य दिया था और भगवान् श्रीकृष्ण के प्रपौत्र बज्रनाभ को इन्द्रप्रस्थ का राज्य दिया था श्रीकृष्ण के प्रपौत्र बज्र जीवित बचे थे भाटी ,जडेजा राजस्थान में श्रीकृष्ण के वंशज हैं) मेगास्थनीज ने लिखा है हरिकुलिश (श्रीकृष्ण ) शौरसेनी (यादव) जाति का राजा था , उसने कई विवाह किये व् उसके कई पुत्र हुए । उसने मेथोरा (मथुरा) क्लीसोबेरा (कृष्णनगर-द्वरिका) और पालिबोथरा (इंद्रप्रस्थ) नगर वसाये । हरिकुलिश की 138 वी पीढ़ी में राजा सैंड्रोकोट्स (समुद्रगुप्त) हुए इसका प्रमाण इतिहासकार चिंतामणि विनायक वैद्य ने अपने इतिहास ग्रन्थ “महाभारतमीमांसा” के प्रष्ठ 91 पर किया है ।
समुद्र्गुप्त भारत का महान शासक था जिसने अपने जीवन काल मे कभी भी पराजय का स्वाद नही चखा। अतः उसके बारे मे स्मिथ ने सही कहा है कि समुद्रगुप्त “भारत का नेपोलियन” था । गुप्ता वंशी राजा चन्द्र गुप्ता के वक़्त से ग्रीक आक्रमणकारियों के हमले झेल रहे थे भारत सम्राट चन्द्र गुप्ता के पुत्र समुद्रगुप्त ने ग्रीक आक्रमणकारियों को पूर्वी सिंध नदी को पार करने से पूर्व खदेड़ा गया राजा बन्ने से पूर्व समुद्रगुप्त ने ३२५ ईस्वी पूर्व राजा पुरु के सेनापति बनकर सेना की अगुवाई किया एवं झेलम नदी के तट पर सिकंदर को परास्त कर भारतवर्ष से खदेड़ा था ।
अशोक प्रशस्ति जिसे तथाकथित इतिहासकारों ने मौर्य वंशी अशोक का अभिलेख होने का दावा किया हैं दरअसल वोह अभिलेख मौर्या वंशी राजा अशोकवर्धन पर नहीं बल्कि गुप्ता साम्राज्य के राजा समुद्रगुप्त पर था जिन्हें अशोकादित्य की उपाधि प्राप्त किये थे अशोकादित्य के अभिलेख को यूरोपियन इतिहासकारों ने मौर्यवंशी अशोक का अभिलेख मान लिया (Somayajulu, as quoted by Pandit Kota “The so-called inscriptions of Aśoka do not belong to Aśoka. Most of them do not make any mention of Aśoka. If one or two mentions Aśoka they do not refer to Aśoka Vardhana of the Maurya dynasty, but they refer to Samudragupta of the Gupta dynasty who assumed the title of Aśokaditya.” Reference-: The Plot in Indian Chronology Author Pandit Venkatachelam) ।
सन ३०६ ईस्वी पूर्व समुद्रगुप्ता ने झेलम नदी के तट पर यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को पराजित कर यूरेशिया पर विजय प्राप्त किया था जिन देशो पर विजय प्राप्त किया उनका नाम हैं एरिया, अराकोसिया, जेड्रोसिया, पेरोपेनिसडाई के भू-भाग को अधिकृत कर विशाल गुप्ता साम्राज्य की स्थापना की परन्तु यहाँ भी यूरोपियन इतिहासकार के लिखे किताब पढ़ के आधुनिक इतिहासकारों ने गलत व्याख्यान किया और एरिया को हेरात, अराकोसिया को कंधार,जेड्रोसिया पेरोपेनिसडाई को काबुल बना दिया जब की ग्रीक इतिहासकार के अनुसार एरिया, अराकोसिया, जेड्रोसिया, पेरोपेनिसडाई यूरोप का हिस्सा हैं आइये देखते हैं ग्रीक इतिहासकार क्या कहते हैं जैसे जेड्रोसिया के बारे में (Gedrosia is the borderline of the southern part of the countries of Bactria, Arachosia and Drangiana) इससे पता चलता हैं गलत व्याख्यान किया गया हैं जिन यूरोप देशो पर समुद्रगुप्त ने भगवा परचम लहराया था उन देशो को एशिया का हिस्सा बना दिया गया हैं विदेशी इतिहासकारों द्वारा । समुद्रगुप्ता ने गौरवशाली इतिहास रचा था अपनी विजयरथ भारतवर्ष से निकालकर एशिया , यूरेशिया, यूरोप देश की प्राचीन राजधानी बुडापेस्ट लम्पाक , गुरुंड को जीत कर रोका था ।
समुद्रगुप्त की दूसरी लड़ाई अँटिगोनस प्रथम से सन ३०३ ईस्वी पूर्व जेड्रोसिया में हुआ था इसके पश्चात समूल यूरोप ने समुद्रगुप्त की अधीनता स्वीकार कर लिया था समुद्रगुप्त के आधीन कुल ७५ से अधिक छोटे – बड़े देश उनके साम्राज्य में सम्मिलित हुए थे ।
दो बड़ी लड़ाईयां लड़ने के बाद पूरा यूरोप यूरेशिया पर समुद्रगुप्त का शाशन स्थापित होगया ऐसे विश्व विजयी समारत का इतिहास केवल दो पन्नो में समेट दिया गया ।
इस खोज को पूरा करने में कुल १४ किताब का योगदान हैं जिसमे से अति महत्वपूर्ण किताब हैं
१) इंडियन क्रोनोलॉजी श्री कोटा वेंकटचेलाम
२) Somayajulu Quoted Indian History
३) इतिहासकार चिंतामणि विनायक वैद्य कृत इतिहास ग्रन्थ “महाभारतमीमांसा”
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